........प्रात: 6.00 बजे से:- हवाई जहाज का आसमान में सब्जियों और दालों से गले मिलना [व्यंग्य] - अविनाश वाचस्‍पति........अपरान्ह 1.00 बजे से:- हलवा [बाल साहित्य] - रचना श्रीवास्तव......

मंगलवार, ५ मई २००९

अपनी हमनफ़स के नाम [नज़्म] - धीरज आमेटा 'धीर'

मिरी जाँ तेरी आँख खुलने से पहले
चला हूँ मैं ये रात ढलने से पहले!

मैं पत्तों से थोड़ी सी शबनम उठा लूँ,
मैं सूरज की पेहली किरण को चुरा लूँ


रचनाकार परिचय:-

धीरज आमेटा का तखल्लुस 'धीर' है। आप राजस्थान के उदयपुर शहर के रहने वाले हैं। वर्तमान में आप गुड़गाँव (हरियाणा) में एक हार्डवेयर कम्पनी में इन्जिनियर हैं। आप अंतर्जाल पर सक्रिय हैं तथा ई-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं।


किसी फूल की खिल-खिलाती हँसी को,
किसी खेत की लह-लहाती छवी को!

चहकते हुए पंछियों की सदाएं,
ठुमकती हुई हिरणियों की अदाएं!

भरी दो-पहर में इक अम्बिया की छाया,
महकती हवा और नदिया की धारा!

जो हो जाये फिर शाम को लाल अम्बर
मैं थोड़ा सा सिन्दूर उस का चुरा कर!

ज़रा अपनी आँखों की डिबिया में भर लूँ,
मैं पलकों के पीछे इन्हें क़ैद कर लूँ!

इसी आशियाने में चन्दा निकलते,
मैं आ जाउँगा लौट कर शाम ढलते!

तेरे ख्वाब का शहर इन से सजा के,
तेरी रात के घर की रंगत बढा के!

तेरे चेहरे को रात भर मैं तकुंगा
तेरी नींद की पासबानी करुंगा!

यही सोच कर आज घर से चला हूँ,
मेरी जाँ तेरी आँख खुलने से पहले!
चला हूँ मैं ये रात ढलने से पहले!

11 टिप्पणियाँ:

अनन्या May 5, 2009 1:36 PM  

दिल छू लेने वाली नज़्म

Dr. Ahmad Ali Barqi Azmi May 5, 2009 2:11 PM  

रहे हम नफस आपकी शादो ख़ूररम
न हो ज़िंदगी मेँ उसे कोई भी ग़म

यही है दुआ मेरी धीरज अमेटा
मेज़ाजे मुहब्बत कभी हो न बरहम

अहमद अली बर्क़ी आज़मी

"अर्श" May 5, 2009 4:00 PM  

achhi nazm ke liye badhaayee dheer ji ko..


arsh

निधि अग्रवाल May 5, 2009 5:06 PM  

आपकी अब तक दो ग़ज़लें साहित्य शिल्पी पर पढी हैं और इससे ही आपकी प्रतिभा का अंदाजा लग जाता है। यह नज़्म बेमिसाल है।

निधि अग्रवाल May 5, 2009 5:06 PM  

आपकी अब तक दो ग़ज़लें साहित्य शिल्पी पर पढी हैं और इससे ही आपकी प्रतिभा का अंदाजा लग जाता है। यह नज़्म बेमिसाल है।

अजय यादव May 5, 2009 9:45 PM  

खूबसूरत नज़्म के लिये बधाई!

गौतम राजरिशी May 5, 2009 11:10 PM  

धीरज जी आपकी ग़ज़लों का दीवाना तो था ही , इस अद्‍भुत नज़्म ने दीवानगी और बढ़ा दी है...
बहुत सुंदर रचना सर...इश्क की नयी ऊँचाइयों पे ले जाती हुई

देवेश वशिष्ठ ' खबरी ' May 6, 2009 12:27 AM  

धीर-- नाम जैसी गहरी और नदी जैसी तरल रचना...

nitesh May 6, 2009 7:12 AM  

डुबा दिया...डुबा दिया...मजा आ गया।

रितु रंजन May 6, 2009 7:30 AM  

अध्भुत रचना।

dheer May 6, 2009 11:09 AM  

sabhee mitroN ko meraa namaste!
is pur_khuloos himmat_afzaayee par aap sabhee ka tah e dil se shukra_guzaar huN.
Sahitya shilpi manch kaa aabhaar!

-Dheeraj Ameta "Dheer"

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-ओम प्रकाश शर्मा, मोहिन्दर कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, श्यामल सुमन, शिशिर दूत फिर आया [आज राजाभाई कौशिक के जन्म दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - राजाभाई कौशिक, सुधा ओम ढींगरा , डॉ. वेद व्यथित ,
कहानी:- संगीता पुरी, सूरजप्रकाश ,
गज़ल:-अनिल पाराशर ,
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-बाजारवाद पर "हमकलम" की गोष्ठी - एक रिपोर्ट,

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान -काव्य का रचना शास्त्र: ३५, तुल्ययोगिता में क्रिया, या गुण मिले समान -काव्य का रचना शास्त्र: ३६,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1, सप्ताह-2, सप्ताह-3, सप्ताह-2 सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 10सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 11सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 12
लघु कथा:- एकलव्य - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ,
डायरी:-
पेंटिंग:- मंजीत सिंह के चित्र [ई-प्रदर्शनी]:-

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:- राईटर बनाम कंप्युटर - सुलभ जायसवाल 'सतरंगी',
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:-
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हिन्दी साहित्य का इतिहास:-
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पुस्तक चर्चा:-
अनुवाद:-चार्ल्स डार्विन की आत्म कथा के अनुवाद की बात [पूर्व-कथन] - सूरजप्रकाश, अनुवादक की बात [चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा की भूमिका] - सूरज प्रकाश और के.पी.तिवारी ,
आलेख:- "तू क्या है" - डॉ. कुमार विश्वास, क्या हम भारतीय स्वार्थी बनते जा रहे हैं- दीपक शर्मा, अहसास की संजीदगी बरकरार है पत्रों में - कृष्ण कुमार यादव, अब लोचन अकुलाय, लखिबों लोचन लाल को... छत्तीसगढ़ के गौरव पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय [8 नवंबर पुण्य तिथि पर विशेष] - प्रो. अश्विनी केशरवानी , मुक्तिबोध: कृतित्व एवं रचना का मनोविज्ञान [मुक्तिबोध के जन्मदिवस पर विशेष आलेख] - दिव्यांशु शर्मा , अब नहीं होती बाल सभायें [आलेख] - पंकज व्यास, बच्चों के चाचा नेहरू [बालदिवस की पूर्व संध्या पर विशेष आलेख] - अभिषेक सागर,

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