"माँ मैं तेरा पूत, रोशनी बन कर जीऊँ" [कविता] - रेखा भाटिया
न ही है मुझमें भगतसिंह जैसा जोश ,
न ही नेताजी जैसा बुलंद हौंसला मेरा,
न ही मैं गाँधी-सा सत्यवादी ,
न ही शास्त्री जैसा सादा जीवन मेरा ,
न ही बच्चों में प्रिय मैं चाचा नेहरू जैसा,
न ही आजाद जैसा फौलादी जिस्म है मेरा,
न ही वल्लभ जैसा चमकीला व्यक्तिव मेरा,
न ही बाबासाहेब जैसी दी मैंने कोई कुर्बानी
न ही राजगुरु , सुखदेव-सा फाँसी पर चढ़ा ,
नानी-दादी से सुनी थी कहानियाँ इन योध्दाओं की ,
मैं तो एक साधारण-सा बालक हूँ ,
पर फिर भी माँ मैं हूँ तो तेरा ,
चरणों में तेरे शीश झुकाता हूँ,
श्रद्धा के फूल तेरे मस्तक पर चढ़ता हूँ ,
बलिहारी जाऊं माँ मैं तेरे,
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ.
रचनाकार परिचय:-








13 comments:
पर फिर भी माँ मैं हूँ तो तेरा ,
चरणों में तेरे शीश झुकाता हूँ,
श्रद्धा के फूल तेरे मस्तक पर चढ़ता हूँ ,
बलिहारी जाऊं माँ मैं तेरे,
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ.
देश भक्ति से ओत प्रोत रचना।
बहुत अच्छी कविता, बधाई।
Nice poem, thanks.
Alok Kataria
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ.
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति. सुन्दर रचना
बलिहारी जाऊं माँ मैं तेरे,
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ.
Bahoot sundar bhaavna se likha huvaa geet.......bahoot sundat...
REKHA BHATIA JEE KO DESH BHAKTI
KEE KAVITA PAR DHERON BADHAAEEYAN
बहुत ही सुन्दर , असीम देश प्रेम और दर्शाता और समर्पण प्रदर्शित करता गीत
बलिहारी जाऊं माँ मैं तेरे,
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ
मेरी बधाई स्वीकार करे
सादर
प्रवीण पथिक
रेखा देश भक्ति की बहुत अच्छी कविता लिखी --
बधाई! लिखती रहना ..
बहुत अच्छी रचना है रेखा जी। देशभक्ति से ओत-प्रोत
देश प्रेम और आत्मसमर्पण की भावना से ओतप्रोत सुन्दर गीत
मैं तो एक साधारण-सा बालक हूँ ,
पर फिर भी माँ मैं हूँ तो तेरा ,
चरणों में तेरे शीश झुकाता हूँ,
श्रद्धा के फूल तेरे मस्तक पर चढ़ता हूँ ,
बलिहारी जाऊं माँ मैं तेरे,
बस इतनी तू आशीष दे,
रोशनी बन कर जीऊँ ,
कभी तेरे काम आ सकूँ.
एसी रचनाओं की बहुत आवश्यकता है।
बहुत प्रभावित करने वाली कविता है। साहित्य शिल्पी पर आपका हार्दिक अभिनंदन।
Excellent poem bua. Keep posting more.
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