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मंगलवार, ९ फरवरी २०१०

काव्यलिंग [काव्य का रचना शास्त्र-48] - आचार्य संजीव वर्मा सलिल

'काव्यलिंग' में युक्ति से, स्थापित कर बात.
प्रस्थापित या समर्थित, हो कवि-मत विख्यात..


पर्यायोक्ति के समान ही काव्यलिंग अलंकर में भी चतुराई से किसी मत या बात की स्थापना की जाती है. इसमें प्रायः युक्ति द्वारा कारण देकर किसी बात या मत का समर्थन किया जाता है.

उदाहरण:

१.
कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय.
या खाए बौरात नर, वा पाए बौराय..

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फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
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नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
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यात्रा वृतांत:-

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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