काव्यलिंग [काव्य का रचना शास्त्र-48] - आचार्य संजीव वर्मा सलिल
प्रस्थापित या समर्थित, हो कवि-मत विख्यात..
उदाहरण:
१.
कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय.
या खाए बौरात नर, वा पाए बौराय..
कविता/गज़ल: अब्दुल रहमान "मन्सूर", ओमप्रकाश शर्मा, श्यामल सुमन, कुलदीप अन्जुम, नीरज गोस्वामी, सुशील कुमार
कहानी/लघुकथा: सूरज प्रकाश, शक्ति प्रकाश
हिन्दी साहित्य का इतिहास: जायसी और उनका पद्मावत (प्रस्तुति - अजय यादव)
वीडियो: ग्लोबल वार्मिंग पर राजीव रंजन प्रसाद की कविता का प्रसारण "चैनल वन" से (प्रस्तुति - देवेश वशिष्ठ ’खबरी’)
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

कार्टून - अभिषेक तिवारी
©सर्वाधिकार सुरक्षित- "साहित्य शिल्पी " एक अव्यवसायिक साहित्यिक ई-पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। प्रकाशित रचनाओं के विचारों से "साहित्य शिल्पी" का सहमत होना आवश्यक नहीं है।
किसी भी रचना को प्रकाशित/ अप्रकाशित करना अथवा किसी भी टिप्पणी को प्रस्तुत करना अथवा हटाना साहित्य शिल्पी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
© Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008
Back to TOP
1 comments:
it's a great post
---
EINDIAWEBGURU
एक टिप्पणी भेजें