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Wednesday, May 6, 2009

अपनापन [कविता] - श्यामल सुमन

कैसे गीत खुशी के गाऊँ?
सच्चा मीत कहाँ से लाऊँ?
रिश्ता दुनियाँ में जैसे व्यापार हो गया।
बीते कल का ये मानो अखबार हो गया।।

जीने की खातिर दुनियाँ में रिश्तों का दस्तूर।
भाव नहीं दिखता रिश्तों मे जीने को मजबूर।।
फिर भी जीना भला क्यों स्वीकार हो गया।
बीते कल का ये मानो अखबार हो गया।।

अपनापन दिखलाता जो भी क्या अपना होता है
सच्चे अर्थों में अपनापन तो सपना होता है।।
कैसे कहते हैं अपना परिवार हो गया।
बीते कल का ये मानो अखबार हो गया।।

रंगमंच गर है जीवन तो हम अभिनय करते हैं।
दिखलाना हो सुमन को सचमुच बहुत प्रणय करते हैं।
वह पल लगता है अपना संसार हो गया।
बीते कल का ये मानो अखबार हो गया।।

10 टिप्पणियाँ:

अवनीश एस तिवारी May 6, 2009 1:18 PM  

सुन्दर गीत है |

बधाई |

अवनीश तिवारी

अनन्या May 6, 2009 1:25 PM  

रंगमंच गर है जीवन तो हम अभिनय करते हैं।
दिखलाना हो सुमन को सचमुच बहुत प्रणय करते हैं।
वह पल लगता है अपना संसार हो गया।
बीते कल का ये मानो अखबार हो गया।।

बहुत अच्छी रचना।

बेनामी May 6, 2009 1:27 PM  

Nice Poem.

Alok Kataria

महामंत्री - तस्लीम May 6, 2009 5:00 PM  

गीत के बहाने मन की भावनाएं उडेल कर रख दी हैं आपने। बधाई।

SBAI TSALIIM

रंजना May 6, 2009 6:46 PM  

बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण गीत....कभी सुनूंगी आपके स्वर में.... दुगुना आनंद मिलेगा ,यह तय है...

गीता पंडित (शमा) May 6, 2009 9:08 PM  

बहुत सुन्दर गीत...


बधाई..

श्यामल सुमन May 7, 2009 7:28 AM  

टिप्पणीकारों के प्रति सादर-

मिला समर्थन आपका हृदय से है आभार।
लेखक लेखन में हुआ नव उर्जा संसार।।

सम्पादक जी के प्रति सादर-

रचना संग परिचय छपे यह शिल्पी की रीत।
नहीं छपा परिचय मेरा लेकिन छपा है गीत।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
[email protected]

Shikha Deepak May 7, 2009 12:10 PM  

अच्छी भावपूर्ण रचना...........कई बार पढ़ी हर बार और अच्छी लगी।

मोहिन्दर कुमार May 8, 2009 1:59 PM  

मन के कोमल भावों को समेटे एक सुन्दर गीत

Priya May 8, 2009 11:28 PM  

Bahut sunder

जून -2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': काव्य का रचना शास्त्र: 13,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
आलेख:-
क़ैफ़ी आज़मी पर आलेख श्रंखला- अजय यादव-3, पुरस्कारों की दौड़ और हिन्दी कविता - राम शिव मूर्ति यादव ,
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:- सूरजप्रकाश,

जून -2009 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-तबादला - विभूति नारायण राय, >बस्तर की जनजातियाँ [पुस्तक-अंश-3] - शरद व कविता गौड़ ,
व्यंग्य:-
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:- डॉ. जगदम्बाप्रसाद दीक्षित से बातचीत - मधु अरोरा,
विमर्श:-
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