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परिचय क्या [कविता] - कुलदीप अंजुम

Parichay kya by Kuldeep Anzum
तुम पूछ रहे हो परिचय क्या
मैं ख्वाब हूँ कोई तथ्य नही

मैं आशा हूँ, अभिलाषा हूँ
कोई जीवन का सत्य नही

मैं हिस्सा नही हकीक़त का
एक मीठी सी अंगडाई हूँ

मैं नव बसंत की कोंपल हूँ
और पतझड़ की रुसवाई भी

मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
और "अंजुम" की तन्हाई भी

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4 टिप्पणियाँ

  1. मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
    और "अंजुम" की तन्हाई भी

    बहुत खूब, अंज़ुम जी! आपकी ये तनहाई तो हमें भी पसंद आई। आशा है कि पुन: आपको पढ़ने का मौका मिलेगा।

    जवाब देंहटाएं
  2. मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
    और "अंजुम" की तन्हाई भी

    वाह वाह

    जवाब देंहटाएं

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