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गुरुवार, १० दिसम्बर २००९

परिचय क्या [कविता] - कुलदीप अंजुम

Parichay kya by Kuldeep Anzum
तुम पूछ रहे हो परिचय क्या
मैं ख्वाब हूँ कोई तथ्य नही

मैं आशा हूँ, अभिलाषा हूँ
कोई जीवन का सत्य नही

मैं हिस्सा नही हकीक़त का
एक मीठी सी अंगडाई हूँ

मैं नव बसंत की कोंपल हूँ
और पतझड़ की रुसवाई भी

मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
और "अंजुम" की तन्हाई भी

4 comments:

अतुल्य १० दिसम्बर २००९ ८:५६ AM  

मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
और "अंजुम" की तन्हाई भी

बहुत खूब, अंज़ुम जी! आपकी ये तनहाई तो हमें भी पसंद आई। आशा है कि पुन: आपको पढ़ने का मौका मिलेगा।

अनिल कुमार १० दिसम्बर २००९ १०:०४ AM  

मैं इस दुनिया के साथ भी हूँ
और "अंजुम" की तन्हाई भी

वाह वाह

निधि अग्रवाल १० दिसम्बर २००९ १०:५७ AM  

छोटे बहर की अच्छी ग़ज़ल।

अभिषेक सागर १० दिसम्बर २००९ ११:४४ AM  

बहुत अच्छी कविता, बधाई।

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
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यात्रा वृतांत:-

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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