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सोमवार, २१ दिसम्बर २००९

पेज थ्री [कविता] - कृष्ण कुमार यादव



रचनाकार परिचय:-
कृष्ण कुमार यादव का जन्म 10 अगस्त 1977 को तहबरपुर, आजमगढ़ (उ0 प्र0) में हुआ। आपनें इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नात्कोत्तर किया है। आपकी रचनायें देश की अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं साथ ही अनेकों काव्य संकलनों में आपकी रचनाओं का प्रकाशन हुआ है। आपकी प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ हैं: अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह), इण्डिया पोस्ट-150 ग्लोरियस इयर्स (अंग्रेजी), अनुभूतियाँ और विमर्श (निबन्ध संग्रह), क्रान्ति यज्ञ:1857-1947 की गाथा।
आपको अनेकों सम्मान प्राप्त हैं जिनमें सोहनलाल द्विवेदी सम्मान, कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, महाकवि शेक्सपियर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान, काव्य गौरव, राष्ट्रभाषा आचार्य, साहित्य-मनीषी सम्मान, साहित्यगौरव, काव्य मर्मज्ञ, अभिव्यक्ति सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, साहित्य श्री, साहित्य विद्यावाचस्पति, देवभूमि साहित्य रत्न, सृजनदीप सम्मान, ब्रज गौरव, सरस्वती पुत्र और भारती-रत्न से आप अलंकृत हैं। वर्तमान में आप भारतीय डाक सेवा में वरिष्ठ डाक अधीक्षक के पद पर कानपुर में कार्यरत हैं।
मँहगी गाड़ियों और वातानुकूलित कक्षों में बैठ
वे जीते हैं एक अलग जिन्दगी
जब सारी दुनिया सो रही होती है
तब आरम्भ होती है उनकी सुबह
रंग-बिरंगी लाइटों और संगीत के बीच
पैग से पैग टकराते
अगले दिन के अखबारों में
पेज थ्री की सुर्खियाँ
बनते हैं ये लोग
देर शाम किसी चैरिटी प्रोग्राम में
भारी-भरकम चेक देते हुये और
मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाते हुये
तैयार कर रहे होते हैं
राजनीति में आने की सीढ़ियाँ
सुबह से शाम तक
कई देशों की सैर करते
कर रहे होते हैं डीलिंग
अपने लैपटाँप के सहारे
वे नहीं जाते
किसी मंदिर या मस्जिद में
कर लेते हैं ईश्वर का दर्शन
अपने लैपटाँप पर ही
और चढ़ा देते हैं चढ़ावा
क्रेडिट-कार्ड के जरिये
सुर्खियाँ बनती हैं
उनकी हर बात
और दौड़ता है
मीडिया का हुजूम उनकी पीछे
क्योंकि
तय करते हैं वे
सेंसेक्स का भविष्य
पर्दे के पीछे से करते हैं
सरकारों के भविष्य का फैसला
बनती है आकर्षण का केन्द्र-बिंदु
सार्वजनिक स्थलों पर उनकी मौजूदगी
और इसलिए वे औरों से अलग हैं।

11 comments:

सुषमा गर्ग २१ दिसम्बर २००९ २:२२ PM  

इस विषय पर पहली कविता पढी है मैने।

नंदन २२ दिसम्बर २००९ ७:३३ AM  

क्योंकि
तय करते हैं वे
सेंसेक्स का भविष्य
पर्दे के पीछे से करते हैं
सरकारों के भविष्य का फैसला
बनती है आकर्षण का केन्द्र-बिंदु
सार्वजनिक स्थलों पर उनकी मौजूदगी
और इसलिए वे औरों से अलग हैं।

सत्य है।

बाजीगर २२ दिसम्बर २००९ ९:३३ AM  

देर शाम किसी चैरिटी प्रोग्राम में
भारी-भरकम चेक देते हुये
और मंत्रियों के साथ फोटो खिंचवाते हुये
तैयार कर रहे होते हैं
राजनीति में आने की सीढ़ियाँ
...पेज थ्री के बहाने बड़े लोगों की पोल खोलती कविता.बधाई!!

Ratnesh २२ दिसम्बर २००९ ९:३४ AM  

वाह भाई! मान गए. बड़ा सटीक चित्रण है आपकी कविता में.

युवा २२ दिसम्बर २००९ ९:३४ AM  

...यहाँ यह भी देखना होगा की जिस तरह मीडिया इन पेज थ्री के चेहरों को अनावश्यक महत्व देकर उन्हें यूथ आइकन बनती है, वह कितना उचित है...एक सार्थक कविता हेतु साधुवाद.

Bhanwar Singh २२ दिसम्बर २००९ ६:५१ PM  

पेज थ्री के बहाने समाज के तथाकथित उच्च वर्ग के सरोकारों (?) को दर्शाती उत्कृष्ट कविता.

Bhanwar Singh २२ दिसम्बर २००९ ६:५१ PM  

पेज थ्री के बहाने समाज के तथाकथित उच्च वर्ग के सरोकारों (?) को दर्शाती उत्कृष्ट कविता.

Rashmi Singh २२ दिसम्बर २००९ ६:५२ PM  

मँहगी गाड़ियों और वातानुकूलित कक्षों में बैठ
वे जीते हैं एक अलग जिन्दगी
जब सारी दुनिया सो रही होती है
तब आरम्भ होती है उनकी सुबह
रंग-बिरंगी लाइटों और संगीत के बीच
पैग से पैग टकराते
अगले दिन के अखबारों में
पेज थ्री की सुर्खियाँ
....Adbhut.

Dr. Brajesh Swaroop २२ दिसम्बर २००९ ६:५३ PM  

बेहद सुन्दर अभिव्यक्ति और भाव..बधाई.

SR Bharti २२ दिसम्बर २००९ ७:३८ PM  

अद्भुत, इस तरह की कविता कभी-कभी पढने को मिलती है....बधाई.

Ram Shiv Murti Yadav २२ दिसम्बर २००९ ८:१५ PM  

बेहद प्रासंगिक कविता.

फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': परिकरान्कुर में रखे, साभिप्राय कवि नाम.-काव्य का रचना शास्त्र: ४७,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
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फरवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

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