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गुरुवार, १७ दिसम्बर २००९

जीवन रीत [गीत] - शशि पाधा


अब न गाऊँगी मैं फिर से
अश्रु भीगा वेदन गीत।

रचनाकार परिचय:-
हिंदी और संस्कृत में स्नातकोत्तर शशि पाधा १९६८ में जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय की सर्वश्रेष्ठ महिला स्नातक रहीं हैं। इसके अतिरिक्त सर्वश्रेष्ठ सितार वादन के लिये भी आप सम्मानित हो चुकीं हैं। २००२ में अमेरिका जाने से पूर्व आप भारत में एक रेडियो कलाकार के रूप में कई नाटकों और विचार-गोष्ठियों में भी सम्मिलित रहीं हैं। आपकी रचनायें भी समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। अमेरिका में आप नार्थ कैरोलिना विश्वविद्यालय में हिंदी अध्यापन से जुड़ गईं।
अब तक आपके दो काव्य-संकलन “पहली किरण” और “मानस-मन्थन” प्रकाशित हो चुके हैं और एक अन्य प्रकाशनाधीन है। पिछले पाँच वर्षों से आप विभिन्न जाल-पत्रिकाओं से भी प्रकाशित हो रहीं हैं।

सागर तीरे चलते -चलते
जोड़ूँगी मोती और सीप|
लहरों की नैया पर बैठी
छू लूँगी उस पार का द्वीप|

अब न पूछूँगी मैं मन से
किसकी हार-किसकी जीत।

ओस कणों में घोल के किरणें
रँग लूँगी अँगना और द्वार|
इन्द्रधनु ले आऊँ नभ से
बिखरा दूँ सतरँगी हार|

छेड़ूँगी वीणा पर फिर से
राग-रंजित सुर संगीत।

डाली पर एकाकी कोयल
करूण स्वरों में गाये गान|
जाऊँ गले लगाऊँ, पूछूँ
कैसे हो यह पीर निदान|

बाँध के सावन ला दूँ उसको
जानूँ वो ही मन का मीत।

जिन रिश्तों ने तोड़ी डोरी
भूलूँ वो सूरत अनजान|
अँधियारों में संग चलें जो
कर लूँगी उनसे पहचान|

नयी दिशाएँ पंथ सँवारे
नूतन होगी जीवन रीत|
फिर से न गाऊँगी मैं अब
अश्रु भीगा वेदन गीत|

7 comments:

अवनीश एस तिवारी १७ दिसम्बर २००९ ७:२६ PM  

सुन्दर , संतुलित वेदना पूर्ण गीत के लिए बढ़ायी |

अवनीश तिवारी

vedvyathit १७ दिसम्बर २००९ ७:२९ PM  

vedna ke bin adhura geet hai
vedna ke bin adhuri prit hai
vedna hi nam hai us pyar ka
jo hmare geet ka sngeet hai
sundr rchna
dr. ved vyathit

योगेन्द्र मौदगिल १७ दिसम्बर २००९ ९:१७ PM  

wahwa...achhi rachna....badhai...

rachana १७ दिसम्बर २००९ ९:३२ PM  

kya sunder geet hai bhavpurn shbdon se susajit
saader
rachana

नंदन १८ दिसम्बर २००९ ८:१५ AM  

जिन रिश्तों ने तोड़ी डोरी
भूलूँ वो सूरत अनजान|
अँधियारों में संग चलें जो
कर लूँगी उनसे पहचान|

ब्अहुत सुन्दर गीत।

बेनामी १८ दिसम्बर २००९ ८:२४ AM  

Nice Poem

Alok Kataria

sumita १८ दिसम्बर २००९ १:५८ PM  

अँधियारों में संग चलें जो
कर लूँगी उनसे पहचान|
बहुत ही सुंदर गीत के लिए बधाई !

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