शाम होते शराब मांगेगा [ग़ज़ल] - दीपक गुप्ता
रचनाकार परिचय:-ज़िन्दगी का हिसाब मांगेगा
वो मुहब्बत में सबसे पहले तो
तेरी आँखों के ख्वाब मांगेगा
मैंने ग़ज़लें कही पता था कि, वो
मुझसे मेरी किताब मांगेगा
तेरे होठों की ताजगी ऐ सनम
बाग़ का हर गुलाब मांगेगा
दिन में तौबा करेगा वो "दीपक"
शाम होते शराब मांगेगा







7 comments:
वो मुहब्बत में सबसे पहले तो
तेरी आँखों के ख्वाब मांगेगा
बहुत खूब।
सच कहा आपने।
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मानवता के नाम सलीम खान का पत्र।
इतनी आसान पहेली है, इसे तो आप बूझ ही लेंगे।
Sundar rachnaa....
वो मुहब्बत में सबसे पहले तो
तेरी आँखों के ख्वाब मांगेगा
IS SHER NE TO DIL ME GHR KAR LIYA.
BAHUT SUNDER
SAADER
RACHANA
दिन में तौबा करेगा वो "दीपक"
शाम होते शराब मांगेगा
...सटीक बात
वो मुहब्बत में सबसे पहले तो
तेरी आँखों के ख्वाब मांगेगा
बहुत ही खूबसूरत भाव!
बहुत सुंदर ग़ज़ल बधाई दीपक जी रचना बहुत बढ़िया लगी
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