'कान्त' पत्थर वोट का संसद से चलाया जायेगा [ग़ज़ल] - श्रीकान्त मिश्र 'कान्त'
रचनाकार परिचय:-कविता/गज़ल: अब्दुल रहमान "मन्सूर", ओमप्रकाश शर्मा, श्यामल सुमन, कुलदीप अन्जुम, नीरज गोस्वामी, सुशील कुमार
कहानी/लघुकथा: सूरज प्रकाश, शक्ति प्रकाश
हिन्दी साहित्य का इतिहास: जायसी और उनका पद्मावत (प्रस्तुति - अजय यादव)
वीडियो: ग्लोबल वार्मिंग पर राजीव रंजन प्रसाद की कविता का प्रसारण "चैनल वन" से (प्रस्तुति - देवेश वशिष्ठ ’खबरी’)
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

कार्टून - अभिषेक तिवारी
रचनाकार परिचय:-©सर्वाधिकार सुरक्षित- "साहित्य शिल्पी " एक अव्यवसायिक साहित्यिक ई-पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। प्रकाशित रचनाओं के विचारों से "साहित्य शिल्पी" का सहमत होना आवश्यक नहीं है।
किसी भी रचना को प्रकाशित/ अप्रकाशित करना अथवा किसी भी टिप्पणी को प्रस्तुत करना अथवा हटाना साहित्य शिल्पी के अधिकार क्षेत्र में आता है।
© Blogger templates The Professional Template by Ourblogtemplates.com 2008
Back to TOP
3 comments:
ram ko fir se hta babr bithaya jayega aap ke shbd vrtman schchai ko vykt kr rhe hai swarth ke liye neta kuchh bhi kr skte hain kash inhe ye bat smjh aa jati to vishv men manvta jivit ho jati
dr ved vyathit
तुम हमारे जख्म फिर से मत कुरेदो
वक्त का मरहम हटाया जायेगा
अच्छा कहा है
श्रीकान्त जी,
बहुत ही सुन्दर विचारों को आपने अपनी इस रचना में पिरोया है.. आज का सत्य यही है. धर्म जैसी पूजनीज वस्तु को भी अपने राजनैतिक सवार्थों के लिये प्रयोग किया जा रहा है.
एक टिप्पणी भेजें