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सोमवार, १० अगस्त २००९

तीन गीतिकाएँ [कविता] - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'




साधना हो सफल नर्मदा- नर्मदा.
वंदना हो विमल नर्मदा-नर्मदा.

संकटों से न हारें, लडें,जीत लें.
प्रार्थना हो प्रबल नर्मदा-नर्मदा.


<span title=रचनाकार परिचय:-

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नें नागरिक अभियंत्रण में त्रिवर्षीय डिप्लोमा. बी.ई.., एम. आई.ई., अर्थशास्त्र तथा दर्शनशास्त्र में एम. ऐ.., एल-एल. बी., विशारद,, पत्रकारिता में डिप्लोमा, कंप्युटर ऍप्लिकेशन में डिप्लोमा किया है। आपकी प्रथम प्रकाशित कृति 'कलम के देव' भक्ति गीत संग्रह है। 'लोकतंत्र का मकबरा' तथा 'मीत मेरे' आपकी छंद मुक्त कविताओं के संग्रह हैं। आपकी चौथी प्रकाशित कृति है 'भूकंप के साथ जीना सीखें'। आपनें निर्माण के नूपुर, नींव के पत्थर, राम नम सुखदाई, तिनका-तिनका नीड़, सौरभ:, यदा-कदा, द्वार खड़े इतिहास के, काव्य मन्दाकिनी २००८ आदि पुस्तकों के साथ साथ अनेक पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का भी संपादन किया है। आपको देश-विदेश में १२ राज्यों की ५० सस्थाओं ने ७० सम्मानों से सम्मानित किया जिनमें प्रमुख हैं : आचार्य, २०वीन शताब्दी रत्न, सरस्वती रत्न, संपादक रत्न, विज्ञानं रत्न, शारदा सुत, श्रेष्ठ गीतकार, भाषा भूषण, चित्रांश गौरव, साहित्य गौरव, साहित्य वारिधि, साहित्य शिरोमणि, काव्य श्री, मानसरोवर साहित्य सम्मान, पाथेय सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, आदि। वर्तमान में आप अनुविभागीय अधिकारी मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग के रूप में कार्यरत हैं।

नाद अनहद गुंजाती चपल हर लहर.
नृत्यरत हर भंवर नर्मदा-नर्मदा.

धीर धर पीर हर लें गले से लगा.
रख मनोबल अटल नर्मदा-नर्मदा.

मोहिनी दीप्ति, आभा मनोरम नवल.
नाद निर्मल नवल नर्मदा-नर्मदा.

सिर कटाते समर में झुकाते नहीं.
शौर्य-अर्णव अटल नर्मदा-नर्मदा.

सतपुडा विन्ध्य मेकल सनातन शिखर
सोन जुहिला सजल नर्मदा-नर्मदा.

आस्था हो शिला, मित्रता हो 'सलिल'.
प्रीत-बंधन तरल नर्मदा-नर्मदा.

* * * * *



खोटे सिक्के हैं प्रचलन में.
खरे न बाकी रहे चलन में.

मन से मन का मिलन उपेक्षित.
तन को तन की चाह लगन में.

अनुबंधों के प्रतिबंधों से-
संबंधों का सूर्य गहन में.

होगा कभी, न अब बाकी है.
रिश्ता कथनी औ' करनी में.

नहीं कर्म की चिंता किंचित-
फल की चाहत छिपी जतन में.

मन का मीत बदलता पाया.
जब भी देखा मन दरपन में.

राम कैद ख़ुद शूर्पणखा की,
भरमाती मादक चितवन में.

स्नेह-'सलिल' की निर्मलता को-
मिटा रहे हम अपनेपन में.

* * * * *



बिना नाव पतवार हुए हैं.
क्यों गुलाब के खार हुए हैं.

दर्शन बिन बेज़ार बहुत थे.
कर दर्शन बेज़ार हुए हैं.

तेवर बिन लिख रहे तेवरी.
जल बिन भाटा-ज्वार हुए हैं.

माली लूट रहे बगिया को-
जनप्रतिनिधि बटमार हुए हैं.

कल तक थे मनुहार मृदुल जो,
बिना बात तकरार हुए हैं.

सहकर चोट, मौन मुस्काते,
हम सितार के तार हुए हैं.

महानगर की हवा विषैली.
विघटित घर-परिवार हुए हैं.

सुधर न पाई है पगडण्डी,
अनगिन मगर सुधार हुए हैं.

समय-शिला पर कोशिश बादल,
'सलिल' अमिय की धार हुए हैं.

* * * * *

11 टिप्पणियाँ:

gita pandit August 10, 2009 2:03 PM  

साहित्य शिल्पी पर आते ही आपकी तीन गीतिकाएं देखकर मन बाग़-बाग़ हो गया....

नमन स्वीकार करें मेरा....

सादर
गीता पंडित

दृष्टिकोण August 10, 2009 4:24 PM  

तीनों ही गीतिकायें बहुत अच्छी है।

अनिल कुमार August 10, 2009 4:28 PM  

सतपुडा विन्ध्य मेकल सनातन शिखर
सोन जुहिला सजल नर्मदा-नर्मदा.

मन का मीत बदलता पाया.
जब भी देखा मन दरपन में.

राम कैद ख़ुद शूर्पणखा की,
भरमाती मादक चितवन में.

बिना नाव पतवार हुए हैं.
क्यों गुलाब के खार हुए हैं.

सभी पंक्तियाँ उद्धरित की जा सकती हैं।

अभिषेक सागर August 10, 2009 4:33 PM  

बहुत अच्छी रचनायें हैं, बधाई।

अवनीश एस तिवारी August 10, 2009 7:10 PM  

पहली एक सुन्दर , भाव पूर्ण लगी |

दूसरी नीतिपूर्ण लगी |

तीसरी जैसे ग़ज़ल | गेय लगी |

बधाई |


अवनीश तिवारी

rachana August 10, 2009 8:16 PM  

संकटों से न हारें, लडें,जीत लें.
प्रार्थना हो प्रबल नर्मदा-नर्मदा.
kitne sunder bhav hai .kya sunder geet hai.
मन का मीत बदलता पाया.
जब भी देखा मन दरपन में.

राम कैद ख़ुद शूर्पणखा की,
भरमाती मादक चितवन में.
bahut khoob.bahut sunder
pranam
saader
rachana

dr roli tiwari mishra August 10, 2009 9:20 PM  

ADBHUT.........SHABD
ADBHUT.........SHILP
ADBHUT ........SAHITYA
ADBHUT.........SANYOJAN
ADBHUT.........SAMPREKSHAN
ADBHUT.........SADHARNIKARAN
ADBHUT.........SAHAJTA
ADBHUT.........SARALTA
ADBHUT.........SANJEEV SALIL

MERA VINAMR NAMAN AVAM SHUBHKAMNAYEN SWEEKAR KAR KRITARTH KARE AACHARYA............

सुशील कुमार August 10, 2009 10:07 PM  

आचार्य संजीव की तीसरी कविता मुझे बेहद पसंद आयी।अन्य कवितायें भी बेहतर हैं। इनकी यह कविता बताती है कि इनमें गजल -विधा की अनंत क्षमताएँ मौजूद है। बधाई।

संगीता पुरी August 10, 2009 11:40 PM  

बहुत अच्‍छी लगी .. तीनो गीतिकाएं एक से बढकर एक .. बहुत बहुत बधाई आपको !!

नंदन August 11, 2009 6:59 AM  

हर गीतिका संपूर्ण और प्रभावित करने वाली।

दिगम्बर नासवा August 11, 2009 3:14 PM  

AACHAARY JI KI TEENO RACHNAON SE MAHAKTA SAAHITY SHILPI LAJAWAAB LAG RAHA HAI......DEJOD RACHNAAYEN HAIN... NAMAN HAI MERA SALIL JI KO

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-ओम प्रकाश शर्मा, मोहिन्दर कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, श्यामल सुमन, शिशिर दूत फिर आया [आज राजाभाई कौशिक के जन्म दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - राजाभाई कौशिक,
कहानी:-
गज़ल:-
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-बाजारवाद पर "हमकलम" की गोष्ठी - एक रिपोर्ट,

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान -काव्य का रचना शास्त्र: ३५,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1, सप्ताह-2 सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 10सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 11
लघु कथा:- एकलव्य - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ,
डायरी:-
पेंटिंग:- मंजीत सिंह के चित्र [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

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