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शुक्रवार, २ अक्तूबर २००९

फूल टहनियों के [कविता] - धीरेन्द्र सिंह

जब कभी बंद किताबों
के सफ्हे खोलता हूं तो कुछ
सूखे हुए फूलों से किरदार उतर आते हैं
गए दिनों में
जब आग लगी थी
शहर के कदीम हिस्से में तो
आये थे मुझे गले लगाने
उन्हें लत थी मेरी किताबों में सोने की
अब किताबों के जले पन्नो से
खुश्बुएं भर आती हैं

जनवरी-2010 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': समासोक्ति -काव्य का रचना शास्त्र: ४४,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1,
लघु कथा:-
डायरी:-
पेंटिंग:- [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

जनवरी -2010 में अब तक प्रकाशित...

पुस्तक-अंश:-
व्यंग्य:-
श्रद्धांजलि:-
साक्षात्कार:-
विमर्श:-
हिन्दी साहित्य का इतिहास:-

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