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शनिवार, १५ अगस्त २००९

क्या मालुम था? [कविता] - प्रवीण शुक्ला

क्या मालुम था मेरा शोणित ,,
केवल पानी कहलायेगा ,,,
क्या मालुम था जीवन अर्पण ,,
ओछा आँका जाएगा ,,,
क्या मालुम था मरने पर भी ,,
अपमानित होकर रोना होगा ,,,
मेरी विधवाओं को पल पल ,,,
दर्दो को ही ढोना होगा ....
क्या मालुम था बलिदानी किस्सा ,,
अखबारों मे खो जाएगा,,,
क्या मालुम था मेरा शोणित ,,
केवल पानी कहलायेगा ,,,
उंगली उठेगी बलिदानों पर ,,
ये सत्कार भला होगा ,,,
लहू अश्रु रोयेगा वो ,,,
जो बलिदानी चाल चला होगा ,,,
आग लगेगी सीने मे ,,,
रो आसूं पी जाएगा ,,,,
क्या मालुम था मेरा शोणित ,,
केवल पानी कहलायेगा ,,,
खूब भुनायेगे बलिदानों को ,,,
वो वोटो की खातिर ,,,
खूब सुनायेगे भाषण ,,,
वो नोटों की खातिर ,,,
नेताओं की साझ सजेगी ,,,
प्यासा सैनिक रह जाएगा ,,
क्या मालुम था मेरा शोणित ,,
केवल पानी कहलायेगा ,,,
क्या मालुम था वीरो का अर्पण ,,,
पैसे से तोला जायेगा ,,,
क्या मालुम था बलिदानों को ,,,
उपहासों मे बोला जाएगा,,,
धूल पड़ेगी तस्वीरों पर ,,,
कुछ मोल नहीं रह जायेगा ,,,,
क्या मालुम था मेरा शोणित ,,
केवल पानी कहलायेगा ,,,
क्या मालुम था जीवन अर्पण ,,
ओछा आँका जाएगा ,,,

10 टिप्पणियाँ:

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' August 15, 2009 6:08 PM  

वर्तमान विसंगतियों को चित्रित करती मार्मिक रचना. मेरे कई पूर्वज स्वतंत्रता के प्रयासों में न-मन-धन से समर्पित रहे पर उनमें से किसी ने यह नहीं सोचा था की आज़ादी के बाद कुछ सुविधाएँ, यश, नाम या पद की दावेदारी होगी. वे और अन्य भी केवल स्वतंत्र देश की कामना में मर मिटे. आज़ादी के बाद सरकारों ने सुविधाएँ और राजनैतिक दलों ने पद देकर शेष बचे जनों में लालसा जगाई. बापू ने इससे बचने के लिए कांग्रेस भंग करने की राय दी थी जो सुनी नहीं गयी. अस्तु...सामयिक और सशक्त रचना.

अभिषेक सागर August 15, 2009 7:27 PM  

बहुत अच्छी कविता, बधाई।

परमजीत बाली August 15, 2009 7:59 PM  

बहुत ही बढिया रचना है।बधाई स्वीकारें।

Mithilesh dubey August 15, 2009 8:47 PM  

शानदार रचना है । स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई। आपने अपने इस रचना के माध्यम से सच्चाई को उकेर कर रख दिया है।

nitesh August 15, 2009 10:15 PM  

स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें।

अमिताभ मीत August 15, 2009 10:54 PM  

बहुत अच्छी रचना. शुक्रिया.

अविनाश वाचस्पति August 15, 2009 10:56 PM  

तब न मालूम था
अब सब मालूम है
पर क्‍या कर सकते हैं
आजादी होते हुए भी
विवश हैं अभिशप्‍त हैं

दिगम्बर नासवा August 16, 2009 11:13 AM  

aaj ke samaaj ka chitran karti ..... swatantrata sainaani ki daastan lajawaab tarah se prastut kari hai aapne.........

अवनीश एस तिवारी August 16, 2009 11:28 AM  

अच्छी रचना है |

बधाई|
अवनीश तिवारी

मोहिन्दर कुमार August 17, 2009 12:00 PM  

राजनैतिक विसंगतियों को उजागर करती एक सशक्त रचना जहां एक वीर सैनानी की जीवन आहूती और एक आंतकवादी में कोई फ़र्क न कर पाने की पीडा झलकती है

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-ओम प्रकाश शर्मा, मोहिन्दर कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, श्यामल सुमन, शिशिर दूत फिर आया [आज राजाभाई कौशिक के जन्म दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - राजाभाई कौशिक,
कहानी:-
गज़ल:-
जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-बाजारवाद पर "हमकलम" की गोष्ठी - एक रिपोर्ट,

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान -काव्य का रचना शास्त्र: ३५,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1, सप्ताह-2 सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 10सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 11
लघु कथा:- एकलव्य - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ,
डायरी:-
पेंटिंग:- मंजीत सिंह के चित्र [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

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