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मंगलवार, ११ अगस्त २००९

रक्षाबंधन [कविता] - दिव्यांशु शर्मा

दीदी जब सावन में,
काली मिट्टी पर उग आए,
हरे पौधों को देखता हूँ,
तो मेरी साँवली कलाई पर,
हरे रंग का रेशम,
खुद ब खुद,
उग आता है,
मैं अपने माथे पर,
सुर्ख रोली ढूँढता हूँ,
और,
जब सहर आसमाँ के माथे पर,
वही लाल रोली मलती है,
तो हल्का-सा टीका मुझे भी,
लगा जाती है!!

बरसात जब बूँदों का अक्षत,
मेरे सर पर छिड़कती है,
तो मैं होश में आता हूँ,
और,
सूनी कलाई, सूनी दुनिया,
सूना माथा पाता हूँ!!

दीदी, कभी भोर, कभी मिट्टी,
कभी बारिश बन कर आओ,
शायद मैं अकेला हूँ,
मुझे साथ ले जाओ...
*****

11 टिप्पणियाँ:

राजीव रंजन प्रसाद August 11, 2009 1:58 PM  

दिव्यांशु बहुत अच्छी कविता है।मन को छू गयी संवेदनायें।

अभिषेक सागर August 11, 2009 2:47 PM  

बहुत अच्छी कविता है, बधाई।

nitesh August 11, 2009 2:49 PM  

दीदी, कभी भोर, कभी मिट्टी,
कभी बारिश बन कर आओ,
शायद मैं अकेला हूँ,
मुझे साथ ले जाओ...

सुन्दर रचना।

दिगम्बर नासवा August 11, 2009 3:15 PM  

MAN MEIN UTAR GAYEE AAPKI RACHNA.... LAJAWAAB LIKHA HAI

gita pandit August 11, 2009 3:35 PM  

दीदी, कभी भोर, कभी मिट्टी,
कभी बारिश बन कर आओ,
शायद मैं अकेला हूँ,
मुझे साथ ले जाओ..



.सावन में एक ऐसी भी बरखा होती है......

नयन भीग गए......दिव्यांशु जी.....

सुषमा गर्ग August 11, 2009 4:34 PM  

प्यार भरी रचना।

अनन्या August 11, 2009 4:56 PM  

संवेदनशील कविता

rachana August 11, 2009 7:37 PM  

kya hi sunder bhav upmaye sab kuchh mujhe bahut achchhi lagi aap ki kavita
saader
rachana

अनिल कुमार August 12, 2009 5:25 AM  

बरसात जब बूँदों का अक्षत,
मेरे सर पर छिड़कती है,
तो मैं होश में आता हूँ,
और,
सूनी कलाई, सूनी दुनिया,
सूना माथा पाता हूँ!!

दीदी, कभी भोर, कभी मिट्टी,
कभी बारिश बन कर आओ,
शायद मैं अकेला हूँ,
मुझे साथ ले जाओ.

एक एक पंक्ति दिल को छू जाती है।

मोहिन्दर कुमार August 13, 2009 11:20 AM  

मर्मस्पर्शी संवेदनायें लिये कविता.

अमिता August 15, 2009 4:40 AM  

बहुत सुंदर रचना है मन को छू गई. यूँ कहो भैया की याद आ गई
सादर
अमिता

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

कविता:-ओम प्रकाश शर्मा, मोहिन्दर कुमार, तेजेन्द्र शर्मा, श्यामल सुमन, शिशिर दूत फिर आया [आज राजाभाई कौशिक के जन्म दिवस पर विशेष प्रस्तुति] - राजाभाई कौशिक,
कहानी:-
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जीवन परिचय:-
नज़म:-
काव्यालोचना:-

साहित्य समाचार:-बाजारवाद पर "हमकलम" की गोष्ठी - एक रिपोर्ट,

गीत:-

कवि चर्चा:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव:-
साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन - रिपोर्ट, " हिन्दी दिवस और साहित्य शिल्पी का आज जन्मदिवस" [आज साहित्य शिल्पी का स्थापना दिवस है] - विशेष प्रस्तुति, " साहित्य शिल्पी वार्षिकोत्सव समारोह/ काव्य गोष्ठी/ ब्लॉगर्स महा सम्मेलन की रिपोर्ट, समाचार माध्यमों एवं विभिन्न ब्ळोग मंचों पर।,

नवम्बर-2009 में अब तक प्रकाशित...

स्थायी स्तंभ:-
गज़ल: शिल्प और संरचना:
नाटक पर स्थायी स्तंभ:
काव्य का रचना शास्त्र - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल': अलंकार परिणाम यदि, कार्य सके संधान -काव्य का रचना शास्त्र: ३५,
हितोपदेश की कहानियों का काव्यरूप:-
अनुकरणीय श्रीमदभगवद गीता [धर्म-आध्यात्म पर स्थायी स्तंभ] - अजय कुमार:-
कार्टून:-
अभिषेक तिवारी:सप्ताह-1, सप्ताह-2 सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 10सुरेश शर्मा की कूची से [कार्टून] - 11
लघु कथा:- एकलव्य - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ,
डायरी:-
पेंटिंग:- मंजीत सिंह के चित्र [ई-प्रदर्शनी]:-
यात्रा वृतांत:-

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