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मंगलवार, ७ जुलाई २००९

धूप से बरसा था यौवन [कविता] - प्रवीण शुक्ला

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धूप से बरसा था यौवन
खिल उठा धरती का मन

रचनाकार परिचय:-
१५ जुलाई १९८४ को फर्रुखाबाद में जन्मे प्रवीण कुमार शुक्ल रसायन विज्ञानं में स्नातक हैं और फिलहाल बवाना में नोकिया सेल्लुलर में बतौर ऍम.आई.एस. कार्यरत हैं।

कवितायें लिखने का शौक बचपन से है। कुछ ऐसा देख कर या सुन कर या महसूस कर जिससे हृदय की भावनाएं उद्वेलित होने लगें तो उन्हें शब्द देने का प्रयास करते रहते हैं।

घास की नोकों से हंसती
चुलबुली झोको से हंसती
प्यार ले ले के बरसती
प्यार दे दे के बरसती
वो चंचली बाला

हर अंग था उसका पुलकित
हर ढंग था उसका हर्षित
यौवन के दहलीज पे
रखती कदम वो चल रही थी
हर मोड़ पर गिरती फिर
गिर कर सभल रही थी

सौन्दर्य उसका गिर रहा था
वस्त्र की सिलवटो से
उठ रही थी मंद गंधे
जुल्फ की लटो से
विचारशील सी वो
मुग्ध चल रही थी
हर घडी घमंड से
उछल रही थी

साँस उसकी तेज थी
और हौसले बढे हुए
कर रहे थे स्वागत
लोग सब खड़े हुए
वो मुस्करा रही थी
गा रही थी
गीत ही गाये जा रही थी

कुछ चमक थी कुछ दमक थी
पहन रखा था जी उसने वसन
धूप से वर्षा था यौवन
खिल उठा धरती का मन

12 comments:

अभिषेक सागर ७ जुलाई २००९ २:०१ PM  

बहुत अच्छी कविता, बधाई।

‘नज़र’ ७ जुलाई २००९ २:१० PM  

बहुत बढ़िया काव्य


---
चाँद, बादल और शाम

रितु रंजन ७ जुलाई २००९ २:५७ PM  

श्रंगार और प्रकृति एक साथ। बहुत खूब।

अनुज ७ जुलाई २००९ ४:३६ PM  

अच्छी कविता।

अनुज कुमार सिन्हा

भागलपुर

दृष्टिकोण ७ जुलाई २००९ ४:३९ PM  

वर्तनी की अशुद्धियाँ हैं। कृपया सुधार कर प्रस्तुत करें।

अविनाश वाचस्पति ७ जुलाई २००९ ५:२९ PM  

प्रकृति और

तनकृति का

मनभावन

चित्रण।

आकांक्षा~Akanksha ८ जुलाई २००९ १२:४९ AM  

Sundar abhivyakti..badhai.

राजीव तनेजा ८ जुलाई २००९ ९:२९ AM  

सही समय पर सही चीज़ ही याद आती है

सुन्दर कविता

दिगम्बर नासवा ८ जुलाई २००९ ४:३० PM  

prakriti की rangon से khili sundar kriti

अर्चना तिवारी ८ जुलाई २००९ ८:०५ PM  

सुंदर कविता है...विशेष कर ए पंक्तियाँ..

कुछ चमक थी कुछ दमक थी
पहन रखा था जी उसने वसन
धूप से वर्षा था यौवन
खिल उठा धरती का मन

श्रद्धा जैन ९ जुलाई २००९ ७:४५ PM  

Bahut hi sunder kavita

Nirmla Kapila १४ जुलाई २००९ ८:२७ PM  

प्रवीण सब से पहले तो तुम्हें जन्म दिन की बहुत बहुत बधाई और ढेरों आशीर्वाद कविता मे प्रकृति और शिंगार का संयोजन बहुत सुन्दरता से किया है बहुत बडिया लिखते हो बहुत आगे जाओगे आसमान छूने का जज़्वा दिल मे ले कर चलो भगवान तुम पर बहुत कृपालु हैं शुभकामनायें

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